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यह एक मजेदार और शिक्षाप्रद कहानी है, जहाँ बलशाली हाथी की सूझबूझ और चालाक लोमड़ी की चतुराई के बीच का मुकाबला दिखाया ग गयी है!
दारोगा हाथी और चोर लोमड़ी
एक बहुत विशाल जंगल था, जिसका राजा शेर तो था, लेकिन कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी गजेन्द्र हाथी को दी गई थी। गजेन्द्र अपनी ईमानदारी और भारी-भरकम शरीर के कारण जंगल का सबसे शानदार 'दारोगा' माना जाता था।
लोमड़ी की चोरी
उसी जंगल में लोमी नाम की एक लोमड़ी रहती थी। वह जितनी चालाक थी, उतनी ही कामचोर। एक रात लोमी ने भालू के शहद के भंडार से कीमती शहद की मटकियाँ चुरा लीं। सुबह जब भालू ने शोर मचाया, तो दारोगा हाथी अपनी ड्यूटी पर तैनात हो गया।
गजेन्द्र हाथी ने अपनी लंबी सूँड हवा में उठाई और गंध से पता लगा लिया कि शहद लोमड़ी की गुफा की तरफ गया है। वह तुरंत वहाँ पहुँचा।
लोमड़ी का नाटक
हाथी को देख लोमड़ी डर तो गई, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। जब गजेन्द्र ने गरजकर पूछा, "लोमी! क्या तुमने भालू का शहद चुराया है?" लोमड़ी ने मासूम चेहरा बनाकर कहा, "अरे दारोगा जी, कैसी बात कर रहे हैं? मैं तो कल रात से बीमार हूँ। देखिए, मैंने तो अपने शरीर पर शहद की जगह कड़वी दवा लगा रखी है।" (दरअसल, उसने चालाकी से शहद को अपने शरीर पर मल लिया था ताकि वह उसे छिपा सके।)
दारोगा की सूझबूझ
गजेन्द्र समझ गया कि लोमड़ी झूठ बोल रही है। वह जानता था कि लोमड़ी को बातों से हराना मुश्किल है। उसने मुस्कुराते हुए कहा, "ओह! अगर तुम बीमार हो तो मुझे तुम्हारी मदद करनी चाहिए। जंगल का नियम है कि बीमार जानवर को तुरंत नदी में नहलाकर साफ करना चाहिए, वरना बीमारी फैल सकती है।"
इससे पहले कि लोमड़ी कुछ कह पाती, हाथी ने अपनी सूँड में नदी का ढेर सारा पानी भरा और 'फुहारा' बनाकर लोमड़ी पर छोड़ दिया।
रंगे हाथों पकड़ना
जैसे ही पानी की बौछार लोमड़ी पर पड़ी, उसके शरीर पर लगा सारा शहद धुलकर ज़मीन पर आ गया। शहद की खुशबू से जंगल की मधुमक्खियाँ वहाँ जुटने लगीं। लोमड़ी का झूठ पकड़ा गया!
गजेन्द्र हाथी ने उसे अपनी सूँड से पकड़कर कहा, "चतुराई अच्छी चीज़ है लोमी, लेकिन चोरी और झूठ का सहारा लेने पर तुम्हारी वही चतुराई तुम्हें फँसा देती है।"
परिणाम: लोमड़ी को सज़ा के तौर पर भालू के बगीचे में एक महीने तक मुफ्त काम करना पड़ा, और गजेन्द्र दारोगा की वाह-वाही पूरे जंगल में हुई।
सीख: कितनी भी चतुराई क्यों न की जाए, सच्चाई को छिपाया नहीं जा सकता। ईमानदारी ही सबसे बड़ी नीति है।
लेखिका- खुशी




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