विद्यालय प्रांगण में खड़ा पिलखन का पेड़ ना जाने कितनी घटानाओं का साक्षी था। बच्चों की शैतानियों से लेकर अध्यापकों के सभी तरह के वार्तालाप को वो चुपचाप सुनता था। उसकी ठंडी छाँव में बच्चों की हँसी ऐसे गूँजती थी जैसे घने जंगल में पक्षी कलरव करते हैं। उसी हँसी के बीच दो लोग जब भी आते तो थोड़ी देर तक तो आँख ना मिलाते। ऐसे लगता जैसे एक दूसरे को जानते ही न हो? लेकिन शीघ्र ही अपनी आँखों से बतियाने लगते। देव सर और नीलम मैम के मन में क्या चल रहा था, उन दोनों के सिवा कोई नहीं जानता था! देव सर गणित पढ़ाते थे। इस स्कूल में पढ़ाते उन्हें दो वर्ष हो चुके थे। व्यवहार कुशल थे। विनम्रता और समय की पाबंदी, उनकी पहचान थी।
नीरा मैम हिंदी की अध्यापिका थीं। उनके पढ़ाने के अंदाज़ के बच्चे बहुत पंसद करते थे। हाल हीं में बीएड पूरा किया था। स्कूल से जुड़े मुश्किल से दो महीने हुए थे। शुरु-शुरु में औपचारिकतावश देव सर और नीलम मैडम थोड़ा -बहुत बोल लिया करते थे। लेकिन धीरे - धीरे देव सर को लगने लगा कि नीलम कोई आम लड़की नहीं है। सुंदर- सुशील तो वो थी हीं। मानसिक रूप से भी वो बहुत मजबूत लगीं। उनमें गजब का आकर्षण था। ना चाहते हुए भी देव सर, नीलम मैम की और खींचने लगे। शीघ्र ही नीलम मैम को लगने लगा कि देव सर के मन में शायद कुछ चल रहा है। धीरे-धीरे समय गुजरता गया। देव सर ने अपने व्यवहार से नीलम मैडम के प्रति अपनी भावनाएं जताने में कोई कसर नहीं छोड़ी। ऐसा नहीं था नीलम मैम कुछ नहीं समझती ती। सत्य तो यह था कि वो भी देव सर की तरफ आकर्षित हो रहीं थी। यह स्वभाविक ही था। इसलिए वो चाहकर भी देव सर से कुछ कह नहीं पाती। उल्टे उनकी बातें नीलम मैम को अच्छी लगती। दोनों को एक दूसरे का साथ बासंती पवन जैसा प्यारा लगने लगा। दोनों इस बात क पूरा ख्याल रखते कि कहीं किसी और को इस बात की भनक न लग जाए कि दोनों प्रेम डगर पर चल रहे थे।
इसलिए जैसे ही स्कूल पहुँचते तो ऐसे दिखाते जैसे एक-दूसरे से कोई मतलब ही न हो। सच तो यह था कि दोनों मर्यादावश ऐसा करने के लिए विवश होते। फिर जैसे ही मौका मिलता तो देव सर पूछ ही लेते- "चाय लेंगी आप?" उत्तर में नीलम मैम बस मुस्करा भर देती। देव सर समझ जाते और स्कूल की कैंटीन से बाकी के लिए भी चाय का ऑर्डर दे देते। किसी न किसी बहाने दोनों एक -दूसरे के साथ रहने का बहाना ढूंढते। लेकिन मर्यादा में। दोनों ने कभी मर्यादा भंग नहीं की। प्रेम का दूसरा नाम मर्यादा ही होता है।
एक दिन दोनों के आस-पास जब कोई नहीं था। नीलम मैम ने मुस्करारते हुए पूछा- " सर, आप के मन में क्या है?" देव सर ने नीलम मैम को पहले तो देखा फिर मुस्कराकर बोले- "आप को क्या लगता है? "नीलम मैम ने आँखें नीचे कर लीं लेकिन कुछ कहा नहीं। देव सर का हृदय धड़कने लगा। समझ नहीं आ रहा था कि क्या कहें? डर था कि कहीं कोई बात नीलम मैम को बुरी न लग जाए। अचानक नीलम मैम बोली-"एक छात्र कह रहा था आप जैसा गणित कोई नहीं पढ़ाता!" देव सर ने नीलम मैम की तरफ देखते हुए कहा कि आप जैसी हिंदी भी कोई नहीं पढ़ाता। दोनों मुस्कराने लगे। फिर दोनों ही शांत हो गए। लेकिन पिलखन का पेड़ साक्षी था कि इस शांति में भी एक अपनापन था। एक प्रेम कहानी थी और दो प्रेमी थे जो प्रेम डगर पर चल पड़े थे।
-वीरेंद्र सिंह




अचानक नीलम मैम बोली-"एक छात्र कह रहा था आप जैसा गणित कोई नहीं पढ़ाता!"
जवाब देंहटाएं- शायद यही प्रेम का प्रारम्भ है
सुंदर कहानी
जवाब देंहटाएंसुंदर
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